रायपुर। छत्तीसगढ़ की प्राचीन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। जापान के मत्सुयामा स्थित एहिमे यूनिवर्सिटी के 17 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को ऐतिहासिक नगरी सिरपुर का भ्रमण किया। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के लिए विशेष हेरिटेज टूर का आयोजन किया, जिसमें उन्हें सिरपुर की बौद्ध, हिंदू और जैन विरासत से रूबरू कराया गया।
एनआईटी रायपुर की मेजबानी में 12 से 14 सितंबर 2026 तक छत्तीसगढ़ दौरे पर आए जापानी प्रतिनिधिमंडल में विद्यार्थी, शोधार्थी और अकादमिक क्षेत्र से जुड़े सदस्य शामिल रहे। अकादमिक और शोध सहयोग के उद्देश्य से आए प्रतिनिधिमंडल ने सिरपुर के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों का भ्रमण कर यहां की प्राचीन स्थापत्य कला, धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता को करीब से समझा।
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने प्रतिनिधिमंडल के लिए विशेष हेरिटेज टूर के साथ स्थानीय गाइड और आतिथ्य की व्यवस्था की। जापानी मेहमानों की खान-पान संबंधी पसंद को ध्यान में रखते हुए विशेष भोजन की व्यवस्था भी की गई। स्थानीय विशेषज्ञों ने प्रतिनिधिमंडल को सिरपुर के इतिहास और पुरातात्विक महत्व की जानकारी दी।
महानदी के तट पर स्थित सिरपुर प्राचीन समय में श्रीपुर के नाम से जाना जाता था और दक्षिण कोसल की राजधानी के रूप में इसका महत्वपूर्ण स्थान रहा है। पुरातात्विक उत्खननों के दौरान यहां बौद्ध विहारों, हिंदू मंदिरों, जैन अवशेषों और प्राचीन स्थापत्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रमाण मिले हैं। यही विविधता सिरपुर को देश के प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों में विशेष स्थान दिलाती है।
प्रतिनिधिमंडल के भ्रमण का प्रमुख आकर्षण लक्ष्मण मंदिर रहा। लगभग सातवीं शताब्दी से संबंधित यह मंदिर प्राचीन ईंट निर्मित मंदिर स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। मंदिर की वास्तुकला, अलंकरण और ईंटों पर की गई बारीक कारीगरी ने जापानी प्रतिनिधिमंडल का ध्यान आकर्षित किया। सदस्यों ने मंदिर के गर्भगृह, अंतराल और मंडप सहित विभिन्न स्थापत्य विशेषताओं को देखा और इसके ऐतिहासिक संदर्भों की जानकारी ली।
इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने आनंद प्रभु कुटी विहार का भ्रमण किया। यह सिरपुर के प्रमुख बौद्ध पुरातात्विक स्थलों में शामिल है। विहार परिसर की संरचना, बुद्ध प्रतिमा और पद्मपाणि अवलोकितेश्वर से जुड़े कलात्मक अवशेषों के बारे में प्रतिनिधिमंडल को जानकारी दी गई। यहां मौजूद मठीय संरचना ने जापानी विद्यार्थियों और शोधार्थियों की विशेष रुचि जगाई।
जापान की सांस्कृतिक परंपरा में बौद्ध दर्शन के गहरे प्रभाव को देखते हुए सिरपुर के बौद्ध अवशेष प्रतिनिधिमंडल के लिए खास महत्व रखते थे। उन्होंने प्राचीन बौद्ध शिक्षा, मठीय जीवन और स्थापत्य परंपरा को समझने में रुचि दिखाई।
जापानी प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्तिक विहार का भी अवलोकन किया। अपने विशिष्ट स्वास्तिकाकार वास्तु विन्यास के कारण यह स्थल सिरपुर की पुरातात्विक विरासत में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उत्खनन से यहां बुद्ध और पद्मपाणि से संबंधित प्रतिमाओं सहित कई बौद्धकालीन अवशेष मिले हैं। प्रतिनिधिमंडल ने यहां की वास्तु योजना और प्राचीन धार्मिक गतिविधियों के बारे में जानकारी हासिल की।
हेरिटेज टूर के दौरान तीवरदेव महाविहार भी प्रतिनिधिमंडल के भ्रमण का प्रमुख केंद्र रहा। इस परिसर की कला में बौद्ध और हिंदू परंपराओं का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। यहां बुद्ध प्रतिमाओं के साथ गंगा-यमुना, गजलक्ष्मी और अन्य पौराणिक एवं अलंकरणात्मक शिल्प देखने को मिलते हैं। प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय कला में दिखाई देने वाले इस सांस्कृतिक समन्वय को विशेष रुचि से देखा।
सिरपुर में हुए पुरातात्विक उत्खननों से अनेक बौद्ध विहारों, शिव और विष्णु मंदिरों तथा जैन परंपरा से जुड़े अवशेष सामने आए हैं। यहां मिले पुरातात्विक प्रमाण इस बात की झलक देते हैं कि प्राचीन समय में सिरपुर धार्मिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा होगा।
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने इस यात्रा को केवल ऐतिहासिक स्मारकों के भ्रमण तक सीमित नहीं रखा। प्रतिनिधिमंडल को स्थानीय संस्कृति और छत्तीसगढ़ के आतिथ्य से जोड़ने का भी प्रयास किया गया। स्थानीय गाइडों ने जापानी विद्यार्थियों और शोधार्थियों को सरल तरीके से सिरपुर के इतिहास, स्थापत्य और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी।
एनआईटी रायपुर के प्रोफेसर दिलीप सिंह सिसोदिया ने प्रतिनिधिमंडल के सिरपुर भ्रमण के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की ओर से की गई व्यवस्थाओं और सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के हेरिटेज टूर केवल पर्यटन अनुभव तक सीमित नहीं रहते, बल्कि विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक और अकादमिक संवाद को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
एहिमे यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधिमंडल का सिरपुर भ्रमण छत्तीसगढ़ की प्राचीन विरासत को अंतरराष्ट्रीय अकादमिक और पर्यटन नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे सिरपुर को विदेशी विद्यार्थियों, शोधार्थियों, इतिहासकारों और सांस्कृतिक अध्येताओं के बीच एक महत्वपूर्ण विरासत स्थल के रूप में पहचान दिलाने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
सिरपुर में इतिहास, धर्म, कला, स्थापत्य और सांस्कृतिक सह-अस्तित्व की समृद्ध कहानी मौजूद है। जापान से आए अकादमिक प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा इसी विरासत को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की दिशा में एक नई कड़ी बना है। साथ ही इस यात्रा ने छत्तीसगढ़ और जापान के बीच अकादमिक, सांस्कृतिक और पर्यटन संवाद को मजबूत करने की संभावनाओं को भी बढ़ाया है।










