दुनियाभर में हर साल 22 हजार लड़कियां कम उम्र में गर्भवती होने और बच्चा पैदा करने के दौरान मर जाती हैं। दोनों समस्याएं बाल विवाह के चलते पैदा होती हैं। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर सेव द चिल्डे्रन नामक संस्था की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक बाल विवाह के कारण दुनिया में प्रतिदिन औसतन 60 लड़कियों की जान जाती है। इनमें से छह लड़कियां प्रतिदिन दक्षिण एशिया में मरती हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया में प्रतिवर्ष दो हजार लड़कियां कम उम्र में विवाह के चलते मौत का शिकार होती हैं। भारत और पाकिस्तान भी दक्षिण एशिया में आते हैं। पूर्वी एशिया और प्रशांत महासागर क्षेत्र में प्रतिवर्ष 650 लड़कियां और लैटिन अमेरिकी-कैरेबियाई देशों में प्रतिवर्ष 560 लड़कियों की असमय मौत होती है।
बाल विवाह के कारण सर्वाधिक मौतें पश्चिम और मध्य अफ्रीकी देशों में होती है। वहां करीब 9,600 लड़कियां हर साल मरती हैं। इन देशों में प्रतिदिन 26 साल से कम उम्र की लड़कियां असमय मौत की शिकार हो जाती हैं। इस क्षेत्र में किसी अन्य क्षेत्र की तुलना में कम उम्र वाली लड़कियों के मरने की संख्या चार गुना ज्यादा रहती है। बीते 25 साल बाल विवाह कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण रहे। इस दौरान करीब आठ करोड़ बाल विवाह कम हुए।
कोविड-19 महामारी और लाकडाउन के चलते स्कूलों की बंदी, स्वास्थ्य सुविधाओं की मुश्किलों, बेरोजगारी पैदा होने, गरीबी बढ़ने, मंदी की स्थिति बनने और घरेलू हिसा बढ़ने से पूरी दुनिया में लड़कियों की शिक्षा पर बुरा असर पड़ा है। इसके चलते बाल विवाह की कुप्रथा ने फिर से जोर पकड़ा है। 2030 तक कम उम्र लड़कियों के विवाह का सिलसिला बढ़ने की आशंका है।
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