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इस दशहरे करिये आंतरिक बुराई को खत्म, जानें पूजा मुहूर्त और शस्त्र पूजा की विधि


Ekhabri धर्मदर्शन,पूनम ऋतु सेन।आज 14 अक्टूबर के दिन पूरे भारतवर्ष में धूमधाम से दशहरा का पर्व मनाया जाएगा। विजयादशमी पर्व को रावण पर भगवान राम की जीत और दानव महिषासुर पर देवी दुर्गा की विजय के रूप में मनाया जाता है।

बुराई पर अच्छाई की जीत

वहीं आज के समय में यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का ही प्रतीक हैं। बुराई किसी भी रूप में हो सकती हैं जैसे क्रोध, असत्य, बैर, ईर्ष्या, दुःख, आलस्य आदि। किसी भी आतंरिक बुराई को ख़त्म करना भी एक आत्म विजय हैं और हमें प्रति वर्ष अपने में से इस तरह की बुराई को खत्म कर विजय दशमी के दिन इसका जश्न मनाना चाहिये, जिससे एक दिन हम अपनी सभी इन्द्रियों पर राज कर सके।

दशहरा या विजयादशमी



प्राचीन काल की मान्यताओं के अनुसार अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी को विजयदशमी का उत्सव मनाया जा रहा है। तो वहीं जब श्री राम ने इसी दिन लंकापति रावण का वध कर दिया तो इस दिन को दशहरा के नाम से जाना जाने लगा। इस प्रकार एक ही दिन इन दो नामों का अपना अलग महत्व भी है।


पूजा मुहूर्त

विजयादशमी पूजा का मुहूर्त दोपहर 01:16 से 03:34 बजे तक रहेगा। सबसे शुभ मुहूर्त या विजय मुहूर्त की बात करें तो वो दोपहर 02:02 बजे से 02:48 बजे तक रहेगा। दशमी तिथि की शुरुआत 14 अक्टूबर को शाम 06:52 बजे से लेकर 15 अक्टूबर को शाम 06:02 बजे तक रहेगी।



मंत्र

मंगलार्थ महीपाल नीराजनमिदं हरे ।
संगृहाण जगन्नाथ रामचंद्र नमोस्तु ते ।।
ऊँ परिकरसहिताय श्रीसीतारामचंद्राय कर्पूरारार्तिक्यं समर्पयामि।

शस्त्र पूजा

शुभ कार्य हेतु शुभ मुहूर्त का होना उत्तम माना गया है। इस अवधि में किये गये सभी कार्यों में विजय अवश्य मिलती है। इसी शुभ मुहूर्त में अपने अस्त्र-शस्त्रों की पूजा करना अच्छा माना जाता है।
पहले शस्त्रों के ऊपर ऊपर शुद्ध जल छिड़क कर पवित्र करें, फिर महाकाली स्तोत्र का पाठ कर शस्त्रों पर कुंकुम, हल्दी का तिलक लगाकर पुष्पों की माला आदि से श्रृंगार कर धूप-दीप दिखाकर मावे मिष्ठान का भोग लगाये । इसके बाद देवी मंत्र का जाप करते हुए आरती कर प्रसाद वितरण करें।

पूर्व या उत्तर मुख बैठकर पहले शमी का पूजन निम्न मंत्र का पाठ करते हुए करें-
शमी शमय मे पापं शमी लोहितकंटका।
धारिण्यर्जुन बाणानां रामस्य प्रियवादिनी॥
करिष्यमाणयात्रायां यथाकालं सुखं मम।
तत्र निर्विघ्नकर्त्री त्वं भव श्रीरामपूजिते ॥

फिर अश्मंतक की प्रार्थना निम्न मंत्र से करें-
अश्मंतक महावृक्ष महादोषनिवारक।
इष्टानां दर्शनं देहि शत्रूणां च विनाशनम्‌॥

क्या है महत्वपूर्ण बातें

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परंपराओं के अनुसार दशहरे पर शमी के पेड़ की पूजा भी की जाती है वहीं खाने में पान चबाने की परंपरा भी है। दशहरे पर शाम के समय रावण दहन किया जाता है।

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