महाराष्ट्र के राज्यपाल को उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर नोटिस

उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल ने आदेश पर महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को नोटिस जारी किया है। कोश्‍यारी पर मुख्यमंत्री रहते हुए आवास और अन्य सुविधाओं का बकाया जमा नहीं करने का आरोपी है। कोर्ट ने उन्हें चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

रूरल लिटिगेशन एंड एंटाइटेलमेंट केंद्र (रुलक) देहरादून की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में पिछले साल पूर्व मुख्यमंत्रियों से आवास व अन्य सुविधाओं का बकाया छह माह में जमा करने के आदेश पारित किए थे। छह माह में भी बकाया जमा नहीं करने पर रुलक ने अवमानना याचिका दायर की। कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि आदेश का अनुपालन क्यों नहीं कराया गया। क्यों न पूर्व मुख्यमंत्रियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाय।

इसके बाद रुलक संस्था ने पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को संवैधानिक पद पर होने की वजह से संविधान के अनुछेद 361 के तहत नोटिस भेजा। इसके अंतर्गत राज्यपाल व राष्ट्रपति के खिलाफ अवमानना याचिका दायर करने से पहले दो माह पहले सूचना देनी आवश्यक होती है। 10 अक्टूबर को 60 दिन पूरे होने के बाद रुलक द्वारा राज्यपाल के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कार्तिकेय हरिगुप्ता के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री कोश्यारी पर आवास व अन्य सुविधाओं का बाजार दर के हिसाब से 47.57 लाख रुपये बकाया है। इसके अतिरिक्त बिजली पानी का बकाया भी है।

बुधवार को न्यायाधीश न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्यपाल कोश्यारी को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए। कोश्यारी के अधिवक्ता द्वारा नोटिस रिसीव भी कर लिया गया है।

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पूर्व सीएम बहुगुणा व खंडूरी को सुप्रीम कोर्ट से स्टे,  निशंक मामले में अपर सचिव को नोटिस

सुविधाओं के बकाया मामले में पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, पूर्व सीएम बीसी खंडूरी के खिलाफ जारी अवमानना के मामले में सुप्रीम कोर्ट नोटिस पर रोक लगा चुका है। जबकि केंद्रीय शिक्षा मंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक द्वारा बकाया जमा करने के मामले में हाई कोर्ट अपर सचिव दीपेंद्र चौधरी को कारण बताओ नोटिस जारी कर चुका है। यह नोटिस उन्हें बाजार दर से कम किराया जमा करवाने पर दिया गया। निशंक ने हाल में 11 लाख की रकम राज्य संपत्ति विभाग में जमा कराई थी।

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