कवर्धा। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बुधवार को कवर्धा जिले के दौरे के दौरान दूरस्थ आदिवासी अंचलों से लेकर जिला मुख्यालय तक बच्चों के अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े विषयों की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने विशेष जनजाति बैगा क्षेत्र बैरख में बाल चौपाल 2.0 के माध्यम से बच्चों से सीधे संवाद किया। इसके साथ ही विभिन्न शैक्षणिक और आवासीय संस्थानों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और कलेक्टर सभागृह में विभागीय अधिकारियों के साथ योजनाओं की समीक्षा की।
डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के बच्चे प्रतिभाशाली और होनहार हैं। उन्हें बेहतर अवसर, तकनीकी संसाधन और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराकर उनके भविष्य को और मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों को बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ काम करने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान आदिवासी बालक आश्रम बैरख सहित अन्य संस्थानों में साफ-सफाई की कमी, भंडार गृह में गंदगी, शिक्षकों की कमी और मलेरिया से बचाव की व्यवस्थाओं में कमियां सामने आईं। आयोग अध्यक्ष ने इन कमियों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
मलेरिया से बचाव के लिए नई मच्छरदानियां उपलब्ध कराने, शिक्षकों की कमी के संबंध में सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी को आवश्यक पत्राचार कर आयोग को जानकारी देने और संस्थानों में स्वच्छता व्यवस्था बेहतर करने के निर्देश दिए गए। हाई स्कूल में साइंस उपकरणों की कमी और अव्यवस्था को भी तत्काल दूर करने की हिदायत दी गई।
शासकीय बालक गृह कवर्धा का भी आयोग अध्यक्ष ने निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों के साथ रात्रि भोजन किया और बाल गृह के एक बच्चे का जन्मदिन भी मनाया। उन्होंने बच्चों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी ली।
बैरख में आयोजित बाल चौपाल 2.0 में बच्चों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। बच्चों ने अपनी झिझक दूर करते हुए आयोग अध्यक्ष के सामने खुलकर अपनी बात रखी और अपने अनुभव साझा किए। बाल चौपाल में क्विज और बाल अधिकारों पर आधारित सांप-सीढ़ी जैसे रोचक खेलों के माध्यम से बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।
चौपाल के दौरान बच्चों ने प्रेरणादायक कहानियां और अपने जीवन से जुड़ी यादें भी साझा कीं। गुड टच-बैड टच, चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर और बाल विवाह जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर बच्चों की जागरूकता को लेकर भी चर्चा हुई। आयोग अध्यक्ष ने बच्चों की प्रतिभा और उत्साह को देखते हुए उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ने तथा डिजिटल अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
एकलव्य आवासीय विद्यालय तरेगांव में डॉ. वर्णिका शर्मा ने विद्यार्थियों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन मनाया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने प्रधानमंत्री के संघर्ष और राष्ट्र के प्रति समर्पण से प्रेरित होने की बात कही। बच्चों ने बेहतर भविष्य बनाने और राष्ट्र सेवा में अपना योगदान देने का संकल्प भी व्यक्त किया।
एकलव्य विद्यालय तरेगांव में आयोग अध्यक्ष ने विद्यार्थियों से विभिन्न विषयों पर संवाद कर उनके भविष्य के लक्ष्य जाने। उन्होंने बच्चों की समस्याओं को समय रहते सामने लाने के लिए नियमित काउंसलिंग और आवश्यक सैंपलिंग की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर जोर दिया, ताकि बच्चे बिना किसी झिझक के अपनी बात साझा कर सकें।
कवर्धा के कलेक्टर सभागृह में आयोजित समीक्षा बैठक में विभिन्न विभागों के प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में बाल अधिकारों से जुड़े मामलों, संस्थागत व्यवस्थाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की जानकारी ली गई। आयोग अध्यक्ष ने अधिकारियों को बच्चों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रकरणों पर संवेदनशीलता, तत्परता और जवाबदेही के साथ कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
योजना-वार समीक्षा के दौरान आश्रम शालाओं और छात्रावासों की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए आदिवासी विकास विभाग को निर्देशित किया गया। स्थायी शिक्षक की नियुक्ति होने तक स्कूलों में अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था करने को कहा गया। विशेष रूप से गणित, अंग्रेजी और विज्ञान विषयों के शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में COTPA एक्ट और बालश्रम अधिनियम के तहत विभिन्न विभागों के बीच निरंतर अनुश्रवण और समन्वय के माध्यम से अभियान चलाने पर जोर दिया गया। पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रभावी संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक निर्देश दिए गए।
महिला एवं बाल विकास तथा श्रम विभाग को आपसी समन्वय स्थापित कर प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) और मिनीमाता महतारी जतन योजना के पात्र हितग्राहियों को अधिकतम लाभ दिलाने के निर्देश भी दिए गए। आयोग अध्यक्ष ने कहा कि बच्चों से जुड़ी योजनाओं और व्यवस्थाओं का वास्तविक लाभ जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।










