घने जंगलों के लिए छत्तीसगढ़ देश में प्रसिद्ध है। यहां के जंगल की हरियाली और पाए जाने वाले जानवरों के कारण यह सदा से ही दूर-दूर तक जाने जाते हैं। आज 29 जुलाई को विश्व टाइगर दिवस के रूप में मनाया जाता है। आएये जानें छत्तीसगढ़ के वह कौन से फारेस्ट हैं जो आसनी से टाइगर देखने जाने के लिए प्रसिद्ध हैं।
सीतानदी अभयारण्य- सीतानदी अभयारण्य जिला धमतरी में स्थित है। चारों ओर बड़े पेड़ों और हरियाली से भरा हुआ यह अभयारण्य अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है। इसकी स्थापना 1974 में हुई थी। क्षेत्रफल 559 वर्ग किलो मीटर है। यह भारत के प्राचीन अभयारण्य में इसे शामिल किया गया है 2009 से सीतानदी को टाइगर रिजर्व में शामिल किया गया है। 2006 में उदयन्ती के साथ प्रोजेक्ट टाइगर में शामिल किया गया। यहां सबसे ज्यादा तेंदुआ पाया जाता है। यहां बहने वाली सीता नदी के नाम पर ही इस अभयारण्य का नाम सीतानदी अभयारण्य पड़ा है। यहां पर्याटकों को सबसे ज्यादा बाघ और चीता देखने को मिलते हैं। प्राकृति की सुंदरता बिखेरता यह छत्तीसगढ़ का सबसे खास रिजर्व फारेस्ट है।
अचानकमार- अचानकमार छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि देशभर में जाना जाने वाला राष्ट्रीय उद्यान है। अचानकमार की स्थिापना 1975 में हुई है। सबसे पहले 1981 में इसे राष्ट्रीय उद्यान में शामिल किया गया। इसके बाद सन 1983 में प्रोजेक्ट टाइगर औैर सन 2009 में टाइगर रिजर्व में भी अचानकमार को शामिल किया गया। 552 वर्ग किमी में फैला अचानकमार जिला मुंगेली में स्थित है। अचानकमार वन्य जीवन अभ्यारण्य देश के 14 व बायोस्फियर रिजर्व में शामिल है। यहां चीतल, तेंदुआ, बाघ आसानी से लोगों को देखने मिलते हैं। घने जंगल के कारण यहां बड़ी संख्या में अन्य जानवर भी आसानी से देखने मिलते हैं।
इंदिरावति राष्ट्रीय उद्यान- इंदिरावति राष्ट्रीय उद्यान में प्राकृति की छटा देखने को मिलती है। घने और लंबे बांस के पेड़ इस जंगल को अलग ही सुंदरता देते हैं। इंदिरावति उद्यान छत्तीसगढ़ के अन्य उद्यानों से बिल्कुल अलग है। बिजापुर जिले में स्थित यह राष्ट्रीय उद्यान यहां की प्रसिद्ध नदी इंदिरावति के नाम पर रखा गया है। यह छत्तीसगढ़ के खास तीन टाइगर प्रोजेक्ट में शामिल है। इंदिरावति को 1975 में राष्ट्रीय उद्यान और 1983 में टाइगर प्रोजेक्ट की मान्यता मिली थी। आप यहां आॅक्टूबर से फरवरी के बीच तक आ सकते है।
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