Ppरायपुर। बहुला चतुर्थी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी तिथि पर यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन माताएं अपने संतान की रक्षा और परिवार में सुख-शांति की कामना से व्रत करती हैं। बहुला चतुर्थी पर भगवान गणेश के साथ-साथ श्रीकृष्ण और गौमाता की भी पूजा की जाती है। इस दिन गाय और बछड़े की पूजा की जाती है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। तो आइए जानें बहुला चतुर्थी की तिथि, मुहूर्त, चंद्रोदय का समय और पूजा विधि।
बहुला चतुर्थी का व्रत भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भक्त गणेशजी, भगवान कृष्ण और गौ माता और बछड़े की विधि-विधान से पूजा करते हैं।
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 31 अगस्त, सोमवार के दिन सुबह 8 बजकर 52 मिनट पर होगा। वहीं, अगले दिन यानी 1 सितंबर, मंगलवार के दिन सुबह 7 बजकर 42 मिनट तक चतुर्थी तिथि व्याप्त रहेगी। इस व्रत में चंद्र दर्शन का खास महत्व बताया गया है। ऐसे में 31 अगस्त के दिन बहुला चतुर्थी का व्रत करना शास्त्र सम्मत होगा। बहुला चतुर्थी शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का समय
व्रती महिलाएं बहुला चतुर्थी पर शाम को चंद्र दर्शन और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण करती हैं। इस बार बहुला चतुर्थी पर चंद्रोदय का समय रात के 8 बजकर 29 मिनट का रहेगा। हालांकि, अलग-अलग स्थान के अनुसार चंद्रोदय का समय अलग-अलग हो सकता है।
अमृत चौघड़िया- सुबह 5 बजकर 58 मिनट से 7 बजकर 34 मिनट तक
शुभ चौघड़िया- सुबह 9 बजकर 10 मिनट से 10 बजकर 45 मिनट तक
लाभ चौघड़िया- दोपहर में 3 बजकर 33 मिनट से 5 बजकर 8 मिनट तक
अमृत चौघड़िया- शाम को 5 बजकर 8 मिनट से 6 बजकर 44 मिनट तक
चंद्रोदय का समय- रात में 8 बजकर 29 मिनट पर
बहुला चतुर्थी पूजा विधि
व्रती महिलाओं को बहुला चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करना चाहिए। इसके बाद, साफ वस्त्र धारण करें। शास्त्रों में सूर्योदय से पहले स्नान करना उत्तम माना गया है।
नित्य कर्म करने के बाद सबसे पहले व्रत का संकल्प करें। फिर, पूजाघर को साफ करें और एक लकड़ी की चौकी पर लाल अथव पीले रंग का साफ वस्त्र बिछाएं।
चौकी पर गौमाता की उनके बछड़े के साथ प्रतिमा स्थापित करें। अब सर्वप्रथम भगवान गणेश को तिलक करें और फिर, श्रीकृष्ण व गौमाता को तिलक लगाएं।
भगवान को फूल, माला आदि अर्पित करने के बाद एक शुद्ध घी का दीपक अवश्य प्रज्वलित करें। गणेशजी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है। ऐसे में चतुर्थी तिथि पर उन्हें दूर्वा भी चढ़ाएं।
नारियल, हल्दी, ताजे पुष्प आदि भगवान कृष्ण और गौ माता को अर्पित करें। इसके बाद, विधि-विधान से भगवान की पूजा-आरती करें। पहले गणेशजी की आरती करें और फिर, श्रीकृष्ण की आरती करनी चाहिए।
पूजा व आरती करने के साथ-साथ आप भगवान कृष्ण और गणपतिजी के मंत्रों का जप भी कर सकते हैं। अंत में हलवे का भोग लगाएं और उसे परिवार में प्रसाद के रूप में बांट दें।
शाम के समय चंद्रोदय होने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें। साथ ही, भगवान गणेश, श्रीकृष्ण और गौमाता की पूजा करें। फिर, अपने व्रत का पारण करें। मान्यता है कि विधिपूर्वक इस व्रत को करने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही, भगवान कृष्ण और गणेशजी की कृपा प्राप्त हो सकती है।










