Google Analytics Meta Pixel जल दिवस पर खास खबर, जीवन तभी संभव है, जबतक जल है - Ekhabri.com

जल दिवस पर खास खबर, जीवन तभी संभव है, जबतक जल है

शोध में सामने आ रहे चौकाने वाले अकड़े

आप भी बनिए जल सत्याग्रह का हिस्सा

फाइल फोटो

महिमा पाठक, रायपुर। जल है तो कल है, यह स्लोगन हमने अपने जीवन में हजारों बार पढ़ा होगा लेकिन आज आपने आपसे यह पूछने की आवश्यकता है कि हमने इस पर कितना अमल किया। जल संरक्षण पर किए गए तमाम शोध बार-बार इस बात की ओर आगाह कर रहे हैं, अगर पानी की बचत नहीं की गई तो वह दिन दूर नहीं जब हम एक एक बूंद पानी के लिए तरसेंगे। हाल ही में किए गए एक शोध में सामने आया है कि 2025 से 2050 के बीच हर शहर में पानी में लिए त्राहि त्राहि मच जाएगी। आज जल संरक्षण को लेकर कई मुहिम छेड़ी गई है पर अफसोस की बात तो यह है की जल संचय करने वालों से कही ज्यादा उसका दुरुपयोग करने वालो की संख्या है। आवश्यकता है अब जागरूकता की, जिसका बीड़ा उठाया है वोटर्स वारियर्स ने। विश्व जल दिवस पर जानते हैं इनके द्वारा की गई खास पहल,जिसे व्यक्तिगत जल सत्याग्रह का नाम दिया गया है। पिछले 2 साल से संस्था इस पर काम कर रही है। चंद लोगों से शुरू हुई यह संस्था अब व्यापक रूप ले चुकी है और राज्य के हर जिले में लोगों को जागरूक करने के लिए लगभग एक लाख से भी अधिक लोगों को व्यक्तिगत जल सत्याग्रह के लिए शपथ भी दिला चुकी है।

फाइल फोटो
क्या है व्यक्तिगत जल सत्याग्रह

वाटर वारियर्स संस्था की शुरुआत 2 साल पहले संस्था के संस्थापक अजय शर्मा ने की थी। वह व्यक्तिगत रूप से लोगों को पानी बचाने के लिए जागरूक करने का बीड़ा उठाएं। इस कड़ी में उन्होंने राज्य के विभिन्न जिलों में जाकर सर्वे किया है और लोगों को इसके प्रति जागरूक भी किया है। अजय शर्मा बताते हैं की उन्हें खुद निजी जीवन में पानी को लेकर काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उस समय से ही उन्होंने यह संकल्प लिया कि मुझे खुद तो पानी के दुरुपयोग को रोकना ही है साथ ही साथ उन तमाम लोगों को भी जागरूक करना है जो इसकी कीमत नहीं समझ रहे हैं। व्यक्तिगत जल सत्याग्रह अभियान के लिए स्कूल कॉलेज के साथ-साथ एनसीसी के कैडेट्स और शहर में होने वाले हर बड़े आयोजनों में वहां के संचालकों से संपर्क करते हैं और उन लोगों को मुहिम में शामिल करते है। इसी मुहिम की एक कड़ी है व्यक्तिगत जल सत्याग्रह जिसमें सात बिंदु है और इन 7 बिंदुओं को बोलते हुए यह शपथ दी लाई जाती है कि वह पानी को बचाने की पहल करेंगे। अजय शर्मा के साथ उनकी इस मुहिम में हर वर्ग हर आयु के लोग जुड़े हुए हैं। उनके साथ कई भूजल वैज्ञानिक भी जुड़े हुए हैं जो लोगों को साइंटिफिक तरीके से कम होते जलस्तर के बारे में बताते हैं।

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फाइल वीडियो

भयावह स्थिति के लिए तैयार हों लोग

  विपिन दुबे , भू जल वैज्ञानिक 

पानी की समस्या धीरे-धीरे पूरे छत्तीसगढ़ पांव पसार की जा रही है। भूजल वैज्ञानिक विपिन दुबे का कहना है सेंट्रल वाटर बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ के 16 इलाके में पानी का स्तर बहुत ही नीचे जा चुका है। इन इलाकों में भविष्य में पानी को लेकर बेहद दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। विपिन दुबे पिछले 30 सालों से इस पर कार्य कर रहे हैं। ग्राउंड वाटर के सर्वे पर यह बात सामने आई है कि कुछ साल पहले तक छत्तीसगढ़ में डेढ़ सौ फुट में पानी मिल जाया करता था आज के समय में वह स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।अब 400 से 800 फुट पर पानी मिलता है। इतना ही नहीं अगर इंडस्ट्रियल एरिया की बात करें तो यह स्तर 800 से 1200 पर पहुंच जाता है। पानी के मिलने का स्तर लगातार कम होते जा रहा है उसके बाद भी लोग समझने को खाली नहीं। यह बेहद आवश्यक है कि लोग समय रहते जागरूक हो नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब लोगों को एक एक बूंद पानी के लिए तरसना होगा।

सर्वे में यह भी देखा गया है कि 2025 से 2050 के बीच देश के हर शहर में पानी के लिए त्राहि-त्राहि मच जाएगी। पानी के कम होते स्तर को रोकने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग को विशेष रूप से अनिवार्य करना चाहिए। यही एक ऐसा तरीका है जिससे पानी के स्तर को बनाए रखा जा सकता है। आज के समय में कंक्रीटीकरण के कारण बारिश का पानी वापस जमीन तक पहुंच ही नहीं पता जिस स्तर कम हो रहा है। लोगों द्वारा की जाने वाली छोटी-छोटी पहल से भी बारिश के पानी को वापस जमीन में पहुंचा कर जल का संचय किया जा सकता है।

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अपनाना चाहिए इन तरीकों को

विपिन दुबे के अनुसार एक बड़ी फैक्ट्री की अगर बात करें तो वहां पर 10 से 20 ट्यूबवेल होते हैं लेकिन बहुत कम ही फैक्ट्री में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की सुविधा होती है। यह बेहद आवश्यक है कि इन इलाकों में इस पर ध्यान दिया जाए। इसके लिए सरकार को सख्त से सख्त कार्य करने चाहिए।

पहले गांव में पानी का मुख्य स्त्रोत वहां के तालाब हुआ करते थे लेकिन आज की कृषि ट्यूबवेल पर आधारित है गांव में भी हालत खराब होते जा रहे हैं। खेती में अधिक पानी लगता है। इसके लिए आवश्यक है कि फसल चक्र में परिवर्तन किया जाए अगर फसल चक्र के अनुसार फसलें रोपी जाएंगी तो पानी की खपत कम होगी। उन फसलों को उगाना चाहिए जिनमें पानी की खपत कम हो और जिनमें पानी की खपत अधिक होना है उन फसलों को बारिश के मौसम में लगाना चाहिए जिससे पानी की कमी नहीं होगी।

भारत सरकार को एक सर्वे रिपोर्ट दी गई है जिसमें यह लिखा गया है कि जिन घरों और व्यवसाय क्षेत्रों में ट्यूबवेल है वहां पर टैक्स लिया जाना चाहिए। इस टैक्स को लेने के लिए इसका खास तरीके से क्राइटेरिया तैयार होना चाहिए। जिन स्थानों में पानी के व्यवसायीकरण हो रहा है उनमे बैन लगाना चाहिए और उन्हें पेनल्टी लेने के साथ ही टैक्स भी लेना चाहिए जिससे पानी का लोग सीमित उपयोग करें।

आम लोगों में जागरूकता लाने के लिए यह बेहद आवश्यक है की ट्यूबवेल वाले घरों में टैक्स की वसूली की जाए और जिन घरों में नगर निगम का नाल लगा है वहां पर मीटर व्यवस्था होनी चाहिए। इस मीटर की रीडिंग करने के बाद उनका भुगतान तय करना चाहिए। जितने घंटे पानी का उपयोग हुआ है उनका उतना भी लाना चाहिए इससे लोगों में जागरुकता आएगी।

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